इमाम उल आ़दिलीन हज़रत सय्यदुना उमर ए फ़ारुक़ ए आज़म رضی اللہ تعالیٰ عنہ
(पार्ट - 5)
नमाज़ की अहमियत
आप رضی اللہ تعالیٰ عنہ नमाज़ के मामला में किसी दूसरी चीज़ को अहमियत ना देते थे, आप رضی اللہ تعالیٰ عنہ ने अपने तमाम सोबों (राज्य) के गवर्नरों के पास ये फ़रमान भेजा कि मेरे नज़दीक नमाज़ तुम्हारे सब कामों में अहम है जिसने नमाज़ की हिफाज़त की और उस पर हमेशगी इख़्तियार की उसने अपना दीन महफ़ूज़ कर लिया और जिसने उसे ज़ाऐ (बर्बाद) किया वो दीगर मामलात को भी ज़ाऐ कर देगा।
शहादत
तारीख़े आ़लम के उस अ़ज़ीम हुक्मरान की पूरी ज़िंदगी इज़्ज़त व शराफ़त और अ़ज़मत के कारनामों की आला मिसाल थी, 26 ज़ुलहिज्जतुल हराम की सुबह एक मजुसी ग़ुलाम अबु लुअलुअ फ़िरोज़ ने आप पर फ़ज्र की नमाज़ के दौरान क़ातिलाना हमला किया और शदीद ज़ख़्मी कर दिया, आप رضی اللہ تعالیٰ عنہ ने हज़रत अब्दुर्रहमान बिन औ़फ़ رضی اللہ تعالیٰ عنہ को नमाज़ पढ़ाने का हुक्म दिया, जब लोग आप رضی اللہ تعالیٰ عنہ को उठा कर आपके घर लाए तो मुसलसल ख़ून बहने की वजह से आप पर ग़शी तारी हो चुकी थी होश में आते ही आप رضی اللہ تعالیٰ عنہ ने अपने बेटे का हांथ पकड कर उन्हें अपने पीछे बिठा लिया और वुज़ू कर के नमाज़ ए फ़ज्र अदा की फिर चन्द दिन शदीद ज़ख़्मी हालत में गुज़ार कर अपनी जाने जाने आफ़रीन के सुपुर्द कर दी। हज़रत ए सुहेब رضی اللہ تعالیٰ عنہ ने आप की नमाज़ ए जनाज़ा पढाई। आप رضی اللہ تعالیٰ عنہ को यक्कुम मुहर्रम उल हराम 24 हिजरी रौज़ए रसूल में ख़लीफ़ा ए अव्वल हज़रत ए सिद्दिक़ ए अकबर رضی اللہ تعالیٰ عنہ के पहलू में दफ़न किया गया। बवक़्त शहादत आप رضی اللہ تعالیٰ عنہ की उम्र मुबारक 63 बरस थी। आप رضی اللہ تعالیٰ عنہ से रिवायत करदा अहादीस की तादाद 537 है।
✍🏻 अ़दनान अहमद अ़त्तारी मदनी
📚 माहनामा फ़ैज़ान ए मदीना अक्टूबर 2017
✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी
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