Maidan E Karbala, Part 2

 

मैदान ए कर्बला 

(पार्ट 2 )

इस्लाम में कर्बला की अहमियत 

इस्लामी तारीख़ में इस मक़ाम को ख़ास अहमियत हासिल है क्योंकि नबी ए करीम “ﷺ” ने शहादते इमाम ए हुसैन رضی اللہ تعالیٰ عنہ से मुतल्लिक़ बअ़ताए इलाही ग़ैब की ख़बरें इरशाद फ़रमाए चुनान्चे उम्मुलमोमिनीन हज़रत ए सय्यदुना उम्मे सलमा رضی اللہ تعالیٰ عنہا से रिवायत है कि हज़रत ए जिबरइल علیہ السلام नबी ए करीम “ﷺ” की बारगाह में हाज़िर हुए और ख़बर दी कि आप की उम्मत आप के बाद आप के इस शहज़ादे (हज़रत ए सय्यदुना इमाम ए हुसैन رضی اللہ تعالیٰ عنہ) को कर्बला नामी मक़ाम पर शहीद कर देगी, फिर शहादत गाह की मिट्टी हुज़ूर अकरम “ﷺ” की ख़िदमत में पेश की, नबी ए करीम “ﷺ” ने उसे सुंघा और फ़रमाया "رِيْحُ كَرْبٍ وَبَلَاءٍ" यानी (इस में से) बेचैनी और बला की बू आती है। फिर नबी ए करीम “ﷺ” ने वो मिट्टी उम्मुलमोमिनीन हज़रत ए सय्यदुना उम्मे सलमा رضی اللہ تعالیٰ عنہا को दी और फ़रमाया, जब ये मिट्टी ख़ून हो जाए तो जान लेना कि हुसैन शहीद हो गया।

जारी है......

📚 माहनामा फ़ैज़ान ए मदीना, अक्टूबर 2017

✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी



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