Yazeedi Lashkar Ka Anjaam, Part 1

 

यज़ीदी लश्कर का अन्जाम 

(पार्ट 1)

बाज़ अवक़ात इन्सान इस फ़ानी दुनिया की नेअ़मतों और मक़ाम व मनसब के हुसूल की लालच में अपनी आख़िरत बर्बाद कर बैठता है हालांकि दुनिया भी उसके हांथ नहीं आती। यूं वो दुनिया में भी ज़लील व ख़ार और आख़िरत में दर्दनाक अ़ज़ाब का हक़दार ठहरता है। फ़रमान ए मुस्तफ़ा “ﷺ” है, 

"दुनिया की मोहब्बत हर बुराई की जड़ है।" 

दुनियावी लालच में आकर दो जहां की तबाही व बर्बादी मोल लेने की एक इबर्तनाक मिसाल यज़ीदी लश्कर की है जिसने माल व दौलत और हुकूमत व इक़तदार की ख़ातिर नवासा-ए-रसूल हज़रत ए सय्यदुना इमाम ए हुसैन और उनके रुफ़क़ा رضی اللہ تعالیٰ عنہم को शहीद कर दिया। तारीख़ गवाह है जो लोग उन नुफ़ूसे क़ुद्दसिया के मुक़ाबिले में आए वो ज़िन्दगी में चैन ना पा सके, यहां भी उन्होंने ज़िल्लत व रुस्वाई की सज़ा पायी जबकि मैदान ए महशर का मुआ़मला उसके इलावा है।

जारी है.......

📚 माहनामा फ़ैज़ान ए मदीना, अक्टूबर 2017

✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी

Post a Comment

0 Comments