Yazeedi Lashkar Ka Anjaam, Part 2



यज़ीदी लश्कर का अन्जाम 

(पार्ट 2)

मुख़्तार सक़फ़ी

तक़रीबन 6 हज़ार तो मुख़्तार सक़फ़ी के हांथों हलाक हुए। (मुख़्तार सक़फ़ी :- जिसने क़ातिलाने हुसैन को चुन चुन कर मारा और मुहब्बिने हुसैन के दिल जिते मगर उस पर शकादते अज़ली ग़ालिब हुई और वो नबुवत का झुठा दावा कर के मुर्तद हो गया।) चन्द का इबरत नाक अन्जाम यहां ज़िक्र किया गया है, हज़रत ए सय्यदुना इमाम ए हुसैन رضی اللہ تعالیٰ عنہ का क़ातिल सनान बिन अनस नख़इ एक बार लोगों के दरमियान खड़ा हुआ और कहने लगा, मैंने इमाम ए हुसैन رضی اللہ تعالیٰ عنہ को क़त्ल किया है। ये कह कर वो अपने घर चला गया। अचानक उसकी ज़बान बन्द हो गई, अक़्ल जाती रही, उसकी ये हालत हो गई कि जहां खाता था वहीं पेशाब व पाख़ाना करता था। इब्ने साद, शिमर, क़ैस इब्ने अशअ़स कन्दी, ख़ूली बिन यज़ीद, अ़ब्दुल्लाह बिन क़ैस, यज़ीद बिन मालिक और बाक़ी तमाम बद बख़्त जो हज़रत ए इमाम رضی اللہ تعالیٰ عنہ के क़त्ल में शरीक और कोशिश करने वाले थे तरह तरह के तकलीफ़ों से क़त्ल किए गए और उनकी लाशे घोड़ों की टापो से पामाल करायी गएं। हज़रत ए सय्यदुना इमारह बिन उमैर رضی اللہ تعالیٰ عنہ फ़रमाते हैं, जिस वक़्त इब्ने ज़ियाद और उसके साथियों के सर लाकर रखे गए तो मैं भी उनके क़रीब गया अचानक एक शोर सा बलन्द हुआ वो आ गया, वो आ गया मैंने देखा तो एक बड़ा सांप उन सरों के दरमियान से होता हुआ इब्ने ज़ियाद के सर के पास पहुंचा और उसके नथने में घुस गया। थोड़ी देर बाद निकल कर ग़ायब हो गया। अचानक फिर शोर मचा वो आ गया, वो आ गया फिर वही सांप नमुदार हुआ और दो या तीन बार इसी तरह किया।

जारी है.........

📚 माहनामा फ़ैज़ान ए मदीना, अक्टूबर 2017

✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी

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