यज़ीदी लश्कर का अन्जाम
(पार्ट 3)
अहले बैते अत़हार को बुरा ना कहो
हज़रते सय्यदुना अबुरजाअ ऊतारवी عليه رحمة اللّٰه القَوى फ़रमाते हैं, अहले बैत ए अत़हार को बुरा ना कहो! क्योंकि वो रसूलल्लाह “ﷺ” का घराना है। मेरा एक पड़ोसी था जब हज़रत ए सय्यदुना इमाम ए हुसैन رضی اللہ تعالیٰ عنہ को शहीद किया गया तो उसने आप رضی اللہ تعالیٰ عنہ के बारे में कहा, देखो फ़ुलां बिन फ़ुलां का क्या हाल हुआ। अल्लाह عزوجل ने आसमान से दो सितारे उसकी दोनों आंखों में मारे जिससे वो अन्धा हो गया। ख़ुली बिन यज़ीद जिसने हज़रत ए सय्यदुना इमाम ए हुसैन رضی اللہ تعالیٰ عنہ के सरे अक़दस को तन से जुदा किया था ज़िल्लत की मौत मारा गया। ये घर में छुप गया था उसकी बीवी ने ही उसे पकडवा दिया। मुख़्तार के हुक्म से उसे शाहराहे आ़म पर क़त्ल किया गया फिर उसकी लास को जला दिया गया।
इसी तरह बाक़ी दुश्मनाने अहले बैत भी ज़िल्लत व रुस्वाई की मौत मारे गए और जिस मनसब और माल व दौलत की ख़ातिर उन्होंने नवासा-ए-रसूल के क़त्ल जैसे बदतरीन जुर्म का इर्तकाब किया वो भी उनके हांथ ना रहा। इस वाक़्या से इबरत हासिल करते हुए हर इन्सान को चाहिए कि अपनी आख़िरत को दुनिया पर तरजीह दे और किसी भी बड़ी से बड़ी चीज़ की लालच में आकर अल्लाह عزوجل और उसके रसूल “ﷺ” की नाफ़रमानी ना करें।
📚 माहनामा फ़ैज़ान ए मदीना, अक्टूबर 2017
✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी
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