आईना ए क़ियामत,
(पार्ट 1)
हबीबे ख़ुदा “ﷺ” की बारगाह में फ़ज़्ले शहादत की हाज़री :-
हमारे हुज़ूरे पुरनूर सरवरे आलम “ﷺ” को अल्लाह पाक ने तमाम कमालात व सिफ़ात का मजमए ख़ल्क़ फ़रमाया। हुज़ूर “ﷺ” के से औसाफ़े हमीदा व खसाइले पसन्दीदा किसी मलक, किसी बशर, किसी रसूल, किसी पैग़म्बर में मुमकिन नहीं। ब नज़रे ज़ाहिर , सिर्फ़ फ़ज़्ले शहादत, इस बारगाहे अर्श इश्तिबाह की हाज़िरी से महरूम रहा। इस की निस्बत उलमा ए किराम का ख़्याल है और कितना नफ़ीस ख़्याल है कि जंगे उहुद शरीफ़ में इस रूहे मुसव्वर, जाने मुजस्सम “ﷺ” का दन्दाने मुबारक शहीद होना सब शहीदों से अफ़ज़ल है। और जिस वक़्त हुज़ूरे पुरनूर “ﷺ” का तअल्लुके ख़ातिर शहजादों के साथ ख़्याल में आता है तो इस अम्र के इज़हार में कुछ भी तअम्मुल नहीं रहता कि इन हज़रात की शहादत हुज़ूर “ﷺ” ही की शहादत है और इन्हों ने नियाबतन इस शरफ़ को सर सब्ज़ी व सुर्ख़रूई अ़ता फरमाई।
जारी है......
📚 आईना ए क़ियामत, सफ़ा 12
✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी

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