Aaina E Qayamat, 5

 

आईना ए क़ियामत, 

(पार्ट - 5)

अल्लाह عزوجل के हक़ीकी दोस्त :- 

हज़रते सिरी सक़ती़ رحمتہ اللہ تعالیٰ علیہ से  बा ज़रीए इल्हाम फ़रमाया गया : “ऐ सिरी ! मैं ने मख़्लूक पैदा फ़रमा कर इस से पूछा : "क्या तुम मुझ को दोस्त रखते हो ?" सब ने बिल इत्तिफ़ाक़ अर्ज़ की, कि "तेरे सिवा और कौन है जिसे हम दोस्त रखेंगे ?" फिर मैं ने दुनिया बनाई, नौ हिस्से इस की तरफ़ हो गए, एक हिस्से ने कहा : "हम इस की ख़ातिर तुझ से जुदाई ना करेंगे।" फिर आख़िरत ख़ल्क़ फ़रमाई, इस एक हिस्से से नौ हिस्से इस के ख़रीदार हो गए, बाकियों ने अर्ज़ की : "हम दुनिया के साइल ना आख़िरत पर माइल, हम तो तेरे चाहने वाले हैं।" फिर बलाएं पेश कीं। इन से भी नौ हिस्से घबरा कर परेशान हो गए, एक हिस्से ने अ़र्ज़ की : "तू ज़मीन और आसमान के चौदह तबक़ को बला का एक तौक़ बना कर हमारे गले में डाल दे, मगर हम तेरी तरफ़ से मुंह फेरने वाले नहीं।" इन की निस्बत इरशाद हुआ

اُوْلٰئِكَ اَوْلِيَائِي حَقٍّا،،

 "येह मेरे सच्चे दोस्त हैं।"

अब अहले बैते किराम  رضی اللہ تعالیٰ عنہم की बला पसन्दी हैरत की आंखों से देखने के क़ाबिल है। हज़रते अबू ज़र  رضی اللہ تعالیٰ عنہ से  बला व नेअ़मत के बारे में सुवाल हुआ, फ़रमाया : हमारे नज़दीक दोनों बराबर हैं।  

انچہ از دوست می رسد نیکوست 

इमामे हसन رضی اللہ تعالیٰ عنہ को ख़बर हुई, इरशाद हुआ : "अल्लाह अबू ज़र  رضی اللہ تعالیٰ عنہ पर रहम करे मगर हम अहले बैत के नज़दीक बला, नेअ़मत से अफ़ज़ल है कि नेअ़मत में नफ़्स का भी हज़ (حظ) है और बला महज़ रिज़ाए दोस्त है।"

اَللّٰهُمَّ صَلِّ عَلىٰ سَيِّدِنَا وَمَوْلاَناَ مُحَمَّدٍ وَعَلىٰ اٰلِهِ وَاَصْحَابِهِ اَجْمَعِيْنَ


📚 आईना ए क़ियामत, सफ़ा 19,20


जारी है..........


✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी

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