Seerat Hazrate Siddique Akbar Radiallahu Taala Anhu Ke 15 Bemisaal Fazail, Part 4



 हज़रते सिद्दीक़ ए अकबर رضی اللہ تعالیٰ عنہ के 15 बेमिसाल फ़ज़ाइल,

 (पार्ट - 4)


(11) सबसे ज़्यादा फ़ायदा पहुंचाने वाले :- प्यारे आक़ा “ﷺ” ने एक मर्तबा यूं इरशाद फ़रमाया : जिस शख़्स की सोहबत और माल ने मुझे सब लोगों से ज़्यादा फ़ायदा पहुंचाया वो अबु बक्र है और अगर मैं अपनी उम्मत में से मैं किसी को ख़लील (गहरा दोस्त) बनाता तो अबु बक्र को बनाता लेकिन इस्लामी अख़ूत क़ायम है।

(12) हौज़े कौसर पर रफ़ाक़त :- प्यारे नबी “ﷺ” ने एक दफ़ा हज़रते सिद्दीक़ رضی اللہ تعالیٰ عنہ से फ़रमाया : तुम मेरे साहब हो हौज़े कौसर पर और तुम मेरे साहब हो ग़ार में।

(13) सबसे ज़्यादा मेहरबान :- शफ़ी ए उम्मत “ﷺ” ने हज़रते सय्यदुना जिब्रीले अमीन علیہ السلام से इस्तीफ़सार फ़रमाया : मेरे साथ हिजरत कौन करेगा? तो सय्यदुना जिब्रीले अमीन علیہ السلام ने अर्ज़ की :अबु बक्र (आप के साथ हिजरत करेंगे) वो आप के बाद आप की उम्मत के मुआमलात सम्भालेंगें और वो उम्मत में से सब से अफ़ज़ल और उम्मत पर सब से ज़्यादा मेहरबान हैं।

(14) सिद्दीक़ ए अकबर के एहसानात : नबी ए करीम “ﷺ” ने इरशाद फ़रमाया : मुझ पर जिस किसी का एहसान था मैंने उसका बदला चुका दिया है, मगर अबु बक्र के मुझ पर वो एहसानात हैं जिन का बदला अल्लाह पाक उन्हें रोज़े क़यामत अ़ता फ़रमाएगा।

(15) ख़ास तजल्ली :- प्यारे हबीब “ﷺ” ग़ार ए सौर तशरीफ़ ले जाने लगे तो हज़रते अबु बक्र सिद्दीक़ رضی اللہ تعالیٰ عنہ ने ऊंटनी पेश करते हुए अ़र्ज़ की : या रसूलुल्लाह “ﷺ” इस पर सवार हो जाइए। आप “ﷺ” सवार हो गए फिर आप ने हज़रते अबु बक्र सिद्दीक़ رضی اللہ تعالیٰ عنہ की तरफ़ मुतवज्जा हो कर इरशाद फ़रमाया : ऐ अबु बक्र अल्लाह पाक तुम्हें रिज़वाने अकबर अ़ता फ़रमाए। अ़र्ज़ की : वो क्या है? आप “ﷺ” ने फ़रमाया : अल्लाह पाक तमाम बन्दों पर आ़म तजल्ली और तुम पर ख़ास तजल्ली फ़रमाएगा।

विसाल व मदफ़न :-  आप رضی اللہ تعالیٰ عنہ का विसाल 22 जमादिल आख़िर 13 हिजरी शब सह शम्बा (यानी पीर और मगंल की दरमियानी रात) मदीना मुनव्वरा में मग़रीब व ईशा के दरमियान 63 साल की उम्र में हुआ। हज़रते सय्यदुना उमर बिन ख़त्ताब رضی اللہ تعالیٰ عنہ ने नमाज़े जनाज़ा पढ़ाई। और आप رضی اللہ تعالیٰ عنہ को प्यारे आक़ा “ﷺ” के पहलू में दफ़्न किया गया। 

अल्लाह पाक की उन पर रहमत हो और उनके सदक़े हमारी मग़फ़ीरत हो। 

आमीन

 माहनामा फ़ैज़ाने मदीना, फ़रवरी 2020, सफ़ा 32

✍️अदनान अहमद अत्तारी मदनी

✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी

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