Zakat Ka Bayan, Part 1, Bahar E Shariat

 

ज़कात का बयान

 (पार्ट -1)

अल्लाह पाक फ़रमाता है :-

وَ مِمَّا رَزَقْنٰهُمْ یُنْفِقُوْنَ(3) (پ ١، البقرۃ: ٣)

और मुतक़्क़ी वो हैं कि हमने जो उन्हें दिया है, उस में से हमारी राह में ख़र्च करते हैं।

और फ़रमाता है :-

خُذْ مِنْ اَمْوَالِهِمْ صَدَقَةً تُطَهِّرُهُمْ وَ تُزَكِّیْهِمْ بِهَا (پ ١١، التوبته: ١٠٣)

उनके मालों में से सदक़ा लो, उसकी वजह से उन्हें पाक और सुथरा बना दो।

और फ़रमाता है :-

وَ الَّذِیْنَ هُمْ لِلزَّكٰوةِ فٰعِلُوْنَ(4)  (پ ١٨، المؤمنون : ٤)

और फ़लाह पाते वो हैं जो ज़कात अदा करते हैं।

और फ़रमाता है :-

وَ مَاۤ اَنْفَقْتُمْ مِّنْ شَیْءٍ فَهُوَ یُخْلِفُهٗۚ-وَ هُوَ خَیْرُ الرّٰزِقِیْنَ(39) (پ ٢٢، سبا : ٣)

और जो कुछ तुम ख़र्च करोगे, अल्लाह तआ़ला उसकी जगह और देगा और वह बेहतर रोज़ी देने वाला है।

 बहारे शरीअ़त, जिल्द 1, हिस्सा 5, सफ़ा 866

जारी है.......

✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी


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