ज़कात का बयान
(पार्ट -2)
और अल्लाह पाक फ़रमाता है :-
مَثَلُ الَّذِیْنَ یُنْفِقُوْنَ اَمْوَالَهُمْ فِیْ سَبِیْلِ اللّٰهِ كَمَثَلِ حَبَّةٍ اَنْۢبَتَتْ سَبْعَ سَنَابِلَ فِیْ كُلِّ سُنْۢبُلَةٍ مِّائَةُ حَبَّةٍؕ- وَ اللّٰهُ یُضٰعِفُ لِمَنْ یَّشَآءُؕ-وَ اللّٰهُ وَاسِعٌ عَلِیْمٌ -. اَلَّذِیْنَ یُنْفِقُوْنَ اَمْوَالَهُمْ فِیْ سَبِیْلِ اللّٰهِ ثُمَّ لَا یُتْبِعُوْنَ مَاۤ اَنْفَقُوْا مَنًّا وَّ لَاۤ اَذًىۙ- لَّهُمْ اَجْرُهُمْ عِنْدَ رَبِّهِمْۚ - وَ لَا خَوْفٌ عَلَیْهِمْ وَ لَا هُمْ یَحْزَنُوْنَ -. قَوْلٌ مَّعْرُوْفٌ وَّ مَغْفِرَةٌ خَیْرٌ مِّنْ صَدَقَةٍ یَّتْبَعُهَاۤ اَذًىؕ - وَ اللّٰهُ غَنِیٌّ حَلِیْمٌ - (263) (پ ٣، البقرۃ : ٢٦١-٢٦٣)
जो लोग अल्लाह पाक की राह में ख़र्च करते हैं उनकी कहावत उस दाना की है जिस से सात बालें निकलें। हर बाल में सौ दाने और अल्लाह पाक जिसे चाहता है ज़्यादा देता है और अल्लाह पाक उसअ़त वाला, बड़ा इल्म वाला है। जो लोग अल्लाह पाक की राह में अपने माल ख़र्च करते फिर ख़र्च करने के बाद ना एहसान जताते, ना अज़ियत देते हैं, उनके लिए उनका सवाब उनके रब के हुज़ूर है और ना उन पर कुछ ख़ौफ़ है और ना वो ग़मगीन होंगे। अच्छी बात और मग़फ़ीरत उस सदक़ा से बेहतर है जिसके बाद अज़ियत देना हो और अल्लाह पाक बे परवाह हिल्म (नरमी) वाला है।
और फ़रमाता है :-
لَنْ تَنَالُوا الْبِرَّ حَتّٰى تُنْفِقُوْا مِمَّا تُحِبُّوْنَ وَ مَا تُنْفِقُوْا مِنْ شَیْءٍ فَاِنَّ اللّٰهَ بِهٖ عَلِیْمٌ(92) (پ ٤، اٰلِ عمرٰن : ٩٢)
हरगिज़ नेकी हासिल ना करोगे जब तक उस में से ना ख़र्च करो जिसे महबूब रखते हो और जो कुछ ख़र्च करोगे अल्लाह पाक उसे जानता है।
बहारे शरीअ़त, जिल्द 1, हिस्सा 5, सफ़ा 866-867
जारी है........
मिन जानिब:- इल्म की रौशनी

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